भूमिका
Maruti Suzuki भारत में पहली बार अगले साल अपनी Flex-Fuel कारें लॉन्च करने जा रही है, जो भारतीय आटोमोटिव इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा कदम है। Flex-Fuel वाहनों का मकसद है ऐसे इंजनों को पेश करना, जो पेट्रोल के साथ-साथ उच्च एथनॉल मिश्रणों (E20 से लेकर E85 तक) पर भी आसानी से चल सकें। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह टेक्नोलॉजी क्या है, Maruti का कदम क्यों अहम है, और ग्राहक व देश को इससे क्या लाभ मिलेंगे।

Flex-Fuel तकनीक क्या है?
Flex-Fuel वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं, जो पारंपरिक पेट्रोल के साथ-साथ 20% से 85% तक एथनॉल मिश्रित ईंधन पर भी चलते हैं। इसके लिए कार के फ्यूल सिस्टम और इंजन की कई तकनीकी चीजें बदली जाती हैं:
– हीटेड फ्यूल रेल्स, ताकि ठंडे मौसम में भी आसानी से स्टार्ट हो सके।
– ईंधन के घटकों (पंप, इंजेक्टर, गास्केट, टैंक आदि) का एथनॉल-अनुकूल होना।
– स्मार्ट ईसीयू सॉफ्टवेयर, जो यह पहचानता है कि टैंक में कौन-सा मिश्रण है और उसी हिसाब से परफॉर्मेंस ट्यून करता है।
– एथनॉल सेंसर जो हर समय मिश्रण का सटीक पता कर कार की परफॉर्मेंस व इमीशन कंट्रोल करता है।
Maruti Suzuki की तैयारी: Wagon R और Fronx से शुरुआत
Maruti 2026 तक भारतीय बाजार में अपनी पहली Flex-Fuel कार लॉन्च करने की योजना बना चुकी है, और Wagon R या Fronx पर आधारित इन कारों का प्रोटोटाइप सार्वजनिक रूप से सामने आ भी चुका है। Fronx Flex Fuel कार को हाल ही में Japan Mobility Show 2025 में शोकेस किया गया था।
– Maruti की Flex Fuel कारें E20 से E85 के बीच किसी भी ब्लेंड पर चल सकेंगी, यानी ग्राहकों को फ्यूल वेरायटी चुनने में पूरा लचीलापन मिलेगा।
– मौजूदा पेट्रोल इंजन को मॉडिफाई कर 1.2L K12 इंजन Flex-Fuel के लिए ट्यून किया जाएगा, जिससे पावर लगभग 88-89hp और टॉर्क 113Nm (मौजूदा Fronx Spec) बना रहेगा।

लॉन्च टाइमलाइन और संभावनाएं
Maruti Suzuki अपने पहले फ्लेक्स-फ्यूल वाहन को मार्च 2026 तक भारतीय बाजार में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी का उद्देश्य ऐसी कार पेश करना है जो पेट्रोल के साथ-साथ उच्च प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E20 से E85 तक) पर भी चले सके, जिससे ग्राहकों को ज्यादा फ्यूल विकल्प मिलेंगे। इससे वाहन चलाने की लागत कम होगी, किसानों को नई आर्थिक ताकत मिलेगी और देश की कच्चे तेल आयात पर निर्भरता घटेगी। Maruti की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार Wagon R या Fronx प्लेटफार्म पर आधारित हो सकती है, जिसे डिजाइन, फीचर्स और कम्फर्ट की दृष्टि से सामान्य पेट्रोल कार जैसा ही रखा जाएगा।
फायदे ग्राहकों और देश के लिए
1. किफायती चलना
एथनॉल पेट्रोल से सस्ता होता है, इससे ऑपरेशन कॉस्ट घटती है। ज्यादा एथनॉल ब्लेंड होने पर माइलेज पर थोड़ा असर पड़ सकता है; लेकिन ईंधन की कीमत कम होने से कुल खर्च नियंत्रण में रहता है।
2. पुन उपयोगी फ्यूल विकल्प
ग्राहकों को एक ही इंजन पर अलग-अलग फ्यूल चुनने में Today’s ट्रेंडिंग शब्द—“फ्यूल फ्रीडम”—मिलती है। भविष्य में जब देश में E85 ईंधन स्टेशनों की संख्या बढ़ेगी, ग्राहक पेट्रोल या एथनॉल में से फायदेमंद विकल्प चुन सकेंगे।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर की बाध्यता नहीं
EV की तुलना में Flex-Fuel वाहनों का सबसे बड़ा लाभ है कि उन्हें चार्जिंग स्टेशन या हाईवोल्टेज उपकरण की जरूरत नहीं। सामान्य पेट्रोल पम्प पर ही E20/E85 फ्यूल उपलब्ध कराया जा सकता है।

पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा
– एथनॉल कृषि अपशिष्ट, गन्ना, मक्का आदि फसलों से तैयार होता है, जिससे देश की आयात निर्भरता (क्रूड ऑयल) में कमी आती है।
– ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है; किसानों को नई आमदनी के रास्ते खुलते हैं।
– ग्रीनहाउस गैस व प्रदूषण भी पेट्रोल के मुकाबले कम होता है, जिससे पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
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चुनौतियां और सरकारी पहल
– ईंधन वितरण सिस्टम में अपग्रेड्स जरूरी होंगे, क्योंकि देश में E85 फिलहाल हर जगह उपलब्ध नहीं है।
– सरकार ने 2022 में E20 पेट्रोल का लक्ष्य रखा है और 2030 तक E30-50 ब्लेंडिंग टारगेट है।
– ऐसे में Maruti जैसी कंपनियों के लचीले उत्पाद भविष्य में देश की फ्यूल नीति के साथ तालमेल में होंगे।
ग्राहकों के लिए अनुभव
Maruti Suzuki Flex-Fuel कारें सामान्य पेट्रोल मॉडल जैसी सुविधाएँ (इंटीरियर, फीचर, स्पेस, राइड क्वालिटी) देंगी, जिससे ग्राहकों को अनुभव में कोई समझौता नहीं करना पड़ेगा। फर्क केवल फ्यूलिंग व इंजन सिस्टम में रहेगा।

बाजार की संभावना और निष्कर्ष
Maruti Suzuki का Flex-Fuel सेगमेंट में उतरना भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर है। यह कदम EV और हाइब्रिड वेहिकल्स के बीच एक मजबूत विकल्प देकर देश के ग्राहकों और नीति-निर्माताओं, दोनों के लिए असरदार साबित हो सकता है।
फिलहाल कंपनी का उद्देश्य Wagon R या Fronx जैसी मास-मार्केट कार द्वारा Flex-Fuel टेक्नोलॉजी को जमीन पर उतारना है। अगर यह रणनीति सफल होती है, तो आगे Brezza, Swift, Dzire जैसी लोकप्रिय कारें भी इस टेक्नोलॉजी के साथ आ सकती हैं।

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